Pandit Desraj

पितृ दोष क्या है?

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद यदि उसका अंतिम संस्कार विधि-विधान से नहीं किया जाता है या उस व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति से जुड़े परिवार को पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। यह न केवल एक पीढ़ी बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।

पितृ दोष के प्रमुख कारण

ज्योतिषियों के अनुसार पितृदोष कई प्रकार का होता है। कुंडली की अलग-अलग स्थिति के अनुसार यह जाना जाता है कि व्यक्ति को पितृदोष है या नहीं। 7 कारण।

1. कुंडली का नवम भाव बताता है कि व्यक्ति अपने पूर्व जन्म से अपने साथ कौन से गुण लेकर आया है। यदि कुंडली के नवम भाव में राहु, बुध या शुक्र हो तो यह कुंडली पितृदोष की होती है।

2. कुंडली के दसवें भाव में बृहस्पति का होना शापित माना जाता है। पितृदोष का कारण है गुरु का श्राप।
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3. सप्तम भाव में गुरु हो तो आंशिक पितृदोष माना जाता है।

4. लग्न में राहु हो तो सूर्य ग्रहण व पितृदोष, चंद्रमा के साथ केतु और सूर्य के साथ राहु भी पितृदोष का कारण बनता है।

5. पंचम भाव में राहु होने पर भी कुछ ज्योतिषी पितृदोष मानते हैं।

6. यदि घर का ईशान कोण और ईशान कोण ठीक नहीं है तो यह देव दोष और पितृदोष का कारण बनता है।

पितृ दोष के लक्षण

1पितृ दोष के कारण व्यक्ति को अपने जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है।
2नौकरी और व्यापार में मेहनत करने के बावजूद नुकसान होता रहता है।।
3परिवार में कोई न कोई व्यक्ति हमेशा अस्वस्थ रहता है।
4परिवार में विवाह योग्य लोगों का विवाह न हो पाना।

पितृ दोष से मुक्ति के ऊपाय

1प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
2घर के वास्तु में सुधार करें और ईशान कोण को मजबूत और वास्तु के अनुसार बनाएं।
3परिवार के सभी सदस्यों से बराबर मात्रा में सिक्के लेकर मंदिर में दान कर दें।

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