मंदिर की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर हमेशा ईशान कोण में होना चाहिए। इस दिशा में देवी-देवताओं का वास होता है। इस वजह से इस दिशा को सबसे पवित्र माना जाता है। ईशान कोण में मंदिर बनाने से परिवार पर भगवान की कृपा बनी रहती है। ध्यान रहे कि गलती से भी मंदिर की दिशा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होनी चाहिए। इससे घर में दरिद्रता आ सकती है।
मंदिर का चेहरा
वास्तु के अनुसार मंदिर की दिशा के साथ-साथ उसके मुख की दिशा भी सही होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा में होना चाहिए। वहीं पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होना सबसे अच्छा माना जाता है।
पूजा के लिए घर में मंदिर बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। शास्त्रों में भी मंदिर को लेकर नियमों का जिक्र है। यदि इन नियमों का पालन किया जाए तो पूजा सफल मांनी जाती है
मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें जिनका ध्यान रखना चाहिए
1 घर के मंदिर में रोज सुबह-शाम अगरबत्ती और दीपक अवश्य जलाएं। दीपक जलाने से घर के कई वास्तु दोष दूर होते हैं।
2 शौचालय और पूजाघर एक दूसरे के पास नहीं होने चाहिए। अगर मंदिर के पास बाथरूम है तो उसके दरवाजे हमेशा बंद रखने चाहिए। दरवाजे पर पर्दा भी होना चाहिए।
3पूजा स्थल के पास कुछ खुला स्थान भी होना चाहिए, जहां बैठकर पूजा आसानी से की जा सके।
मंदिर के आसपास पूजा सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, शुभ वस्तुएं रखनी चाहिए। मंदिर के स्थान पर घर का अन्य सामान नहीं रखना चाहिए।
जिन घरों में भगवान का नियमित पांचवे दिन में पूजन होता है उस घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती। और उनके परिवार में हमेश सुख -शांति बनी रहती हैं
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